Sacche pyar ki kahani
गाँव की गलियों में सुबह की पहली किरण उतर रही थी। पक्षियों की चहचहाहट और हलकी सी ठंडी हवा दिल को सुकून दे रही थी। इसी गाँव में रहता था आरव – एक सीधा-सादा, मेहनती और कम बोलने वाला लड़का। वो एक साधारण किसान परिवार से था और अपने माता-पिता के साथ रहता था।
आरव की जिंदगी सीधी थी – खेत, घर और किताबें। लेकिन एक दिन उसकी जिंदगी में नूर की तरह कोई रौशनी आई – सचमुच 'नूर'।
नूर, शहर से गाँव आई थी गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने के लिए। वो अपनी दादी के यहाँ रहने आई थी। पढ़ाई में होशियार, बातों में चंचल, और आंखों में सपने – नूर एकदम अलग थी। जब आरव ने पहली बार उसे देखा, वो गाँव के कुएं पर पानी भरने आई थी। उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा था जो आरव को छू गया।
मुलाक़ातें और एहसास
पहली बार जब आरव और नूर की नजरें मिलीं, तो दोनों थोड़े झिझक गए। नूर ने हल्की सी मुस्कान दी और आरव बस नजरें झुका कर चला गया। लेकिन किस्मत को शायद इन दोनों की मुलाक़ातें और करवानी थीं।
कुछ ही दिनों में नूर ने गाँव के बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। आरव की बहन भी उन्हीं में से एक थी। एक दिन बहन को लेने गया तो नूर ने उसे रोक लिया –
"क्यों आरव, खुद क्यों नहीं पढ़ते? इतने समझदार लगते हो।"
आरव ने सिर्फ मुस्कुरा कर कहा, "पढ़ाई अब खेतों में हो रही है।"
वहीं से उनकी बातें शुरू हुईं। पहले किताबों की, फिर ख्वाबों की, और धीरे-धीरे दिल की।
छोटे-छोटे लम्हे, बड़ी यादें
नूर के लिए गाँव की सादगी एक नई दुनिया थी। आम के पेड़ की छांव, तालाब के किनारे बैठकर बातें करना, मिट्टी की खुशबू – ये सब उसे भाने लगा। और इन सबके बीच आरव था – उसकी खामोशी में छुपी गहराई उसे खींचती थी।
एक दिन बारिश हो रही थी। नूर और आरव दोनों स्कूल के पुराने कमरे में छुपे थे। नूर ने पूछा,
"अगर मैं शहर लौट जाऊं तो... याद रखोगे?"
आरव ने उसकी आंखों में देखा और बस एक शब्द कहा – "नूर तो दिल में बसती है, वो कहाँ जाएगी?"
बिछड़ना – हर प्रेम कहानी की सच्चाई
छुट्टियाँ खत्म होने वाली थीं। नूर को वापस जाना था। उनके बीच कोई वादा नहीं हुआ, लेकिन आंखों में अधूरी बातें थी। नूर ने जाते वक्त बस इतना कहा –
"अगर किस्मत में मिलना लिखा होगा, तो शहर की भीड़ में भी हम मिलेंगे।"
वो चली गई, पर उसकी खुशबू गाँव की हवा में बस गई थी।
सालों बाद – किस्मत की चाल
आरव ने पढ़ाई जारी रखी। उसने खेती के साथ-साथ ऑनलाइन एजुकेशन से ग्रेजुएशन किया और गाँव में एक छोटा स्कूल खोल दिया – "नूर विद्या निकेतन"।
शहर में एक दिन एक NGO से कुछ लोग आए स्कूल देखने। आरव मिट्टी में सने कपड़ों में भी आत्मविश्वास से भरा था। उसी भीड़ में एक चेहरा था – नूर।
वो बदल गई थी – और नहीं भी। आंखें अब भी उतनी ही चमकती थीं। दोनों की आंखें मिलीं, और मुस्कान खिल गई।
अंत – एक नई शुरुआत
नूर ने शहर छोड़ दिया और गाँव में ही रहकर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। और आरव? उसनबस कहा –
"अब नूर बस रौशनी नहीं, मेरी जिंदगी है
सीख:
सच्चा प्यार समय या दूरी से नहीं रुकता। अगर दिल से जुर दिल से जुड़ाव हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं। नूर और आरव की तरह, कभी-कभी सबसे सच्ची कहानियां वहीं होती हैं जहाँ दिल सादगी से धड़कता है।
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